दूध में भी माइक्रोप्लास्टिक! भारतीय दूध के सैंपलों में मिले प्लास्टिक के कण

नई दिल्ली। दूध को भारतीय खान-पान का अहम हिस्सा माना जाता है, लेकिन हालिया शोधों ने दूध में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सितंबर में Journal of Food Composition and Analysis में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, भारत में उपलब्ध पैकेट वाले दूध के साथ-साथ फार्म से लिए गए कच्चे गाय के दूध के सैंपलों में भी माइक्रोप्लास्टिक के कण पाए गए।
शोधकर्ताओं ने नौ सैंपलों की जांच की, जिनमें कुल 66 माइक्रोप्लास्टिक कण मिले। अलग-अलग सैंपलों में प्रति लीटर दूध में करीब 3 से 30 कण पाए गए। जांच में मुख्य रूप से फाइबर और छोटे प्लास्टिक के टुकड़े मिले। इनमें पॉलीएथिलीन और पॉलीप्रोपाइलीन जैसे प्लास्टिक शामिल थे, जिनका इस्तेमाल खाद्य पैकेजिंग में व्यापक रूप से किया जाता है।
पैकेट वाले दूध में ज्यादा कण मिलने का दावा
इस साल जनवरी में Food and Chemical Toxicology में प्रकाशित एक अन्य भारतीय अध्ययन में भी दूध में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी सामने आई। गुजरात स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पैकेट वाले दूध के छह ब्रांड और फार्म से प्राप्त दूध के सैंपलों की जांच की।
अध्ययन के अनुसार, फार्म के दूध में करीब 17.8 माइक्रोप्लास्टिक कण प्रति लीटर, जबकि पैकेट वाले दूध के विभिन्न सैंपलों में करीब 37.8 से 71.1 कण प्रति लीटर तक पाए गए। शोधकर्ताओं ने दूध में प्लास्टिक पहुंचने के संभावित स्रोतों में पैकेजिंग के अलावा पशुओं के चारे के बैग, दूध निकालने वाली मशीनें, फिल्टर और दूध के प्रसंस्करण में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को भी शामिल किया।
सेहत पर कितना असर?
विशेषज्ञों के अनुसार, माइक्रोप्लास्टिक के मानव स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर अभी शोध जारी है। दूध में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी अपने आप में यह साबित नहीं करती कि दूध पीने से बीमारी होती है या कितनी मात्रा में सेवन से स्वास्थ्य जोखिम पैदा होगा।
प्रयोगशाला और पशु-अध्ययनों में माइक्रोप्लास्टिक के संपर्क से सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और कोशिकाओं पर प्रभाव जैसे बदलाव देखे गए हैं। हालांकि, इन प्रभावों को सीधे तौर पर इंसानों में दूध के सेवन से जोड़ने के लिए अभी पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।
शोधकर्ताओं का ध्यान नैनोप्लास्टिक पर भी है, जो माइक्रोप्लास्टिक से छोटे होते हैं और शरीर में इनके व्यवहार को समझने के लिए अतिरिक्त अध्ययन की जरूरत है।
दूध बंद करना समाधान नहीं
विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा शोध के आधार पर दूध का सेवन बंद करने की सलाह देना उचित नहीं है। दूध प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों का महत्वपूर्ण स्रोत है। जरूरत इस बात की है कि दूध के उत्पादन, प्रसंस्करण और पैकेजिंग के दौरान प्लास्टिक के अनावश्यक संपर्क को कम किया जाए और खाद्य पदार्थों में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी तथा उसके स्वास्थ्य प्रभावों पर और व्यापक शोध किया जाए।



