बॉलीवुड में असफलता से हनुमान कृपा तक जानिए एक्टर गजेन्द्र सुथार और फिल्म ‘हनुमान अंश’ के संघर्ष की पूरी कहानी

भोपाल/मुंबई:
सपनों की नगरी मुंबई में हर दिन हजारों लोग अपनी किस्मत आजमाने आते हैं, लेकिन सफलता सिर्फ उन्हीं को मिलती है जो असफलताओं के आगे घुटने नहीं टेकते। ऐसी ही एक प्रेरणादायक और सच्ची कहानी है अभिनेता गजेन्द्र सुथार की, जिन्होंने सालों के संघर्ष, निराशा और असफलताओं के बाद आखिरकार भगवान हनुमान जी की कृपा से फिल्म ‘हनुमान अंश’ में अपनी पहचान बनाई।
2012 से शुरू हुआ संघर्ष का सफर
गजेन्द्र सुथार का अभिनय का सपना साल 2012 में शुरू हुआ, जब वे अपने शहर भोपाल से मुंबई पहुंचे। लगातार 4 सालों तक ऑडिशन देने और कड़ा संघर्ष करने के बाद भी जब कोई बड़ा ब्रेक नहीं मिला, तो वे निराश होकर भोपाल लौट आए। भोपाल आकर उन्होंने अपने बड़े भाई के साथ बिजनेस में हाथ बंटाना शुरू किया। हालांकि, उनका मन बिजनेस में नहीं लगा और अभिनय का जुनून उन्हें एक बार फिर मुंबई खींच लाया।
बड़े स्टार्स के साथ किया काम, फिर भी नहीं मिली पहचान
दूसरी बार मुंबई आने के बाद गजेन्द्र ने जी-तोड़ मेहनत की और कई बड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बने:
• फिल्म ‘गली बॉय’: बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह के साथ काम किया।
• फिल्म ‘कुली नं. 1’: वरुण धवन के साथ कुली का अहम रोल निभाया।
• विज्ञापन और सीरियल्स: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के साथ ‘विक्रम टी’ के ऐड में नजर आए। इसके अलावा ‘दया भाई’ और ‘वन बाय वन’ जैसे कई चर्चित टीवी सीरियल्स में कैमियो रोल किए।
इतने बड़े कलाकारों के साथ काम करने के बावजूद गजेन्द्र को वह मुख्य सफलता या पहचान नहीं मिल पा रही थी, जिसकी उन्हें तलाश थी। हताश होकर वे एक बार फिर मुंबई छोड़ भोपाल वापस आ गए।
13 महीने का संकल्प और भक्ति की ताकत
गजेन्द्र सुथार हनुमान जी के परम भक्त हैं। दूसरी बार भोपाल लौटने के बाद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और भगवान हनुमान जी की शरण ली। उन्होंने पूरे 13 महीनों तक बिना रुके, सच्चे दिल से हनुमान चालीसा का पाठ किया।
गजेन्द्र का मानना है कि—”अगर आप मन से नहीं पढौगे तो हनुमान चालीसा भी काम नहीं आयेगा ।”
‘हनुमान अंश’ से बदली किस्मत
13 महीने के भक्ति संकल्प के बाद, उनके बड़े भाई की सलाह पर गजेन्द्र ने मुंबई में अपने मित्र गिरधर स्वामी को फोन किया। गिरधर स्वामी ने उन्हें निर्देशक विशाल चतुर्वेदी (विशाल सर) का नंबर दिया। विशाल सर से हुई एक फोन कॉल ने गजेन्द्र की जिंदगी बदल दी और उन्हें फिल्म ‘हनुमान अंश’ में काम करने का मौका मिल गया।
फिल्म ‘हनुमान अंश’ महान संत और दिव्य शक्तियों के स्वामी नीम करौली बाबा के जीवन, उनकी भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित है। इस फिल्म का निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने किया है।
गजेन्द्र सुथार का यह सफर उन सभी युवाओं के लिए एक बड़ी सीख है जो असफलताओं से हार मान लेते हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि कड़ी मेहनत, धैर्य और ईश्वर पर अटूट विश्वास हो, तो बंद दरवाजे भी खुल जाते हैं।



