मध्य प्रदेश

MP में मोहन सरकार के तीन साल: उम्मीदों, चुनौतियों और उपलब्धियों का लेखा-जोखा

भोपाल
 मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे। हालांकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सफलता के शोर मचाने पर भी ज्यादा ध्यान नहीं देते। अगले महीने उनके कार्यकाल के तीन साल पूरे होंगे। इन तीन वर्षों में मोहन सरकार को लेकर उम्मीदों से उपलब्धियों तक और भविष्य की तैयारी तक नजर डालें, तो अलग ही तस्वीर दिखाई पड़ती है।

भाजपा ने वर्ष 2023 का विधानसभा चुनाव डॉ. मोहन यादव के चेहरे पर नहीं लड़ा था। ऐसे में उनसे उम्मीद का तो सवाल ही नहीं है, लेकिन उपलब्धियां के खाते को डॉ. मोहन यादव ने कभी अधूरा नहीं छोड़ा।

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री की उपलब्धियों का आकलन प्राथमिकता के तौर पर कृषि क्षेत्र और आदिवासियों के जीवन में खुशहाली के साथ होगा। डॉ. मोहन यादव ने कार्यकाल का पहला वर्ष महिलाओं को और दूसरा उद्योग जगत को समर्पित किया, जहां से निवेश लाने की बड़ी शुरुआत हुई। तीसरा वर्ष किसान कल्याण और अगला वर्ष युवाओं के लिए घोषित है। महिलाओं को लाड़ली बहना योजना में राशि बढ़ाने के साथ विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल रहा है, उन्हें उद्योगों से भी जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।

तीन साल में मध्य प्रदेश में 32 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव आए हैं। इनमें से 12 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। दावा है कि लाखों युवाओं को रोजगार मिला है। वैसे, सरकारी नौकरियों में भी डॉ. मोहन यादव ने दो लाख से अधिक की भर्ती की तैयारी कर रखी है, जिसके लिए वर्षों से अटकी पदोन्नति का रास्ता भी साफ किया गया।

किसान कल्याण देखें, तो न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के साथ ही सस्ती कीमत पर खाद और बिजली के अलावा सोलर पंप की व्यवस्था, क्षति होने पर तुरंत मुआवजा और सम्मान निधि सहित विभिन्न तरीके से किसानों को मजबूत किया जा रहा है। मोहन यादव ने गोपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण को भी जोड़कर खेती-किसानी को नई दिशा दी है। ये प्रयास निश्चित तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं।

अर्थव्यवस्था की बात करें तो प्रदेश का बजट हर साल बढ़ रहा है। मध्य प्रदेश का बजट करीब 4.23 लाख करोड़ तक हो चुका है, जिसे मोहन यादव अपने पूरे कार्यकाल में लगभग सात लाख करोड़ रुपये तक ले जाने के लिए उत्साहित हैं। मध्य प्रदेश में सिंचाई का रकबा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन 65 लाख हेक्टेयर के आंकड़े को बढ़ाकर एक करोड़ हेक्टेयर तक पहुंचाने के लिए उन्होंने तीन राज्यों के साथ नदी जोड़ो परियोजना पर काम भी शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के साथ इन परियोजनाओं से बुंदेलखंड सहित मध्य प्रदेश के बड़े भूभाग पर सिंचाई के लिए जल की उपलब्धता तो बढ़ेगी ही, भरपूर मात्रा में पेयजल और बिजली की भी प्राप्ति होगी।

शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. मोहन यादव ने सांदीपनि स्कूल का ऐसा मॉडल खड़ा किया है, जिसे देशभर में सराहना मिल रही है। हालांकि इसकी सफलता प्रमाणित होने में कुछ साल शेष हैं। कौशल विकास को प्राथमिकता देते हुए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी मोहन यादव ने कदम बढ़ाए हैं। प्रदेश में सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों की संख्या जिलों की संख्या के बराबर यानी 55 तक ले जाने की योजना पर वह आगे बढ़ रहे हैं।

नगरीय विकास का मॉडल भी इन तीन वर्षों में नई दिशा की तरफ मुड़ चुका है। प्रदेश के महानगरों और उनके आसपास के शहरों को मिलाकर अलग-अलग मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनाने की तैयारी है। निश्चित तौर पर इस योजना में महत्वपूर्ण भूमिका सड़कों की है, इसलिए प्रदेश में एक लाख किलोमीटर सड़क के निर्माण का लक्ष्य पहले से ही तय है। मेट्रो ट्रेन की सुविधा के साथ गांव-गांव को जोड़ने वाली मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना की बसें भी पूरे प्रदेश में दौड़ रही हैं।

ऐसी तमाम उपलब्धियों और लक्ष्य की लंबी चर्चा संभव है, लेकिन खास बात यह है कि इनके लिए मोहन यादव ने परंपरागत तरीके से प्रचार या श्रेय लेने की प्रवृत्ति पर निर्भरता नहीं दिखाई। साइलेंट क्रिएटर की भांति संगठन की उम्मीदों को साकार करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।

हालांकि बीते तीन वर्षों से ज्यादा चुनौती अगले दो वर्षों में सामने आना है। स्थानीय निकाय, विधानसभा और उसके बाद लोकसभा के चुनाव के अलावा उज्जैन में सिंहस्थ का आयोजन भी है। सरकार का कार्यकाल जैसे पूर्णता की ओर बढ़ेगा, कैबिनेट में बदलाव का दबाव भी बढ़ेगा। डॉ. मोहन यादव की कार्यशैली इतना संकेत जरूर देती है कि वह आने वाले समय में भी किसी दबाव में झुके बिना अपने रास्ते पर ही आगे बढ़ेंगे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button