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राजगढ़ नगर पालिका में वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप, पार्षद ने आयुक्त भोपाल को भेजी शिकायत फर्जी फाइलों से भुगतान, मोहनपुरा पुनर्वास कॉलोनी में मेजरमेंट में गड़बड़ी, परफॉर्मेंस गारंटी की संदिग्ध रसीदें और डीजल बिलों पर उठाए सवाल

राजगढ़। नगर पालिका परिषद राजगढ़ में कथित वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर वार्ड क्रमांक 05 की पार्षद श्रीमती अम्बे-प्रवीण मिश्रा ने भोपाल संभाग आयुक्त को लिखित शिकायत भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत में नगर पालिका के कामकाज, भुगतान प्रक्रिया, टेंडर व्यवस्था, रिकॉर्ड संधारण तथा कुछ कर्मचारियों को दिए गए अतिरिक्त प्रभार को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
पार्षद द्वारा दिनांक 11 सितंबर 2026 को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि निकाय एवं वार्ड क्षेत्र में लंबे समय से गंभीर प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितताएं किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे शासकीय राशि के दुरुपयोग की आशंका है। शिकायत में संबंधित बिंदुओं की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
एक ही कर्मचारी को कई शाखाओं का प्रभार देने पर सवाल
शिकायत में नगर पालिका परिषद राजगढ़ के कर्मचारी संदीप गुप्ता को लेखापाल के अलावा लोक निर्माण विभाग, टेंडर शाखा, नामांतरण और भंडारगृह का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने पर सवाल उठाया गया है।
पार्षद का आरोप है कि एक ही कर्मचारी के पास कई महत्वपूर्ण शाखाओं का प्रभार होने के कारण वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यों में अनियमितताओं की आशंका बढ़ गई है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि नियमों के अनुसार एक ही व्यक्ति को इतने महत्वपूर्ण कार्यों का प्रभार दिए जाने की स्थिति की जांच की जानी चाहिए।
फर्जी फाइलों के माध्यम से शासकीय राशि के गबन का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि करीब 1 से 1.50 लाख रुपये की फर्जी फाइलें तैयार कर शासकीय राशि का गबन किया जा रहा है। पार्षद ने इन फाइलों की जांच कर वास्तविक कार्य, स्वीकृति, माप, बिल और भुगतान रिकॉर्ड का मिलान कराने की मांग की है।
मोहनपुरा पुनर्वास कॉलोनी के कार्यों में 1.50 से 2 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि निकालने का आरोप
सबसे गंभीर आरोप मोहनपुरा पुनर्वास कॉलोनी में निर्माण कार्यों से संबंधित है। शिकायत के अनुसार निर्माण कार्यों में कथित रूप से गलत तरीके से मेजरमेंट यानी माप दर्शाकर लगभग 1.50 करोड़ से 2 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि निकालकर गलत भुगतान किए जाने का आरोप लगाया गया है।
पार्षद ने इस मामले में मौके पर हुए वास्तविक निर्माण, एमबी में दर्ज माप, स्वीकृत कार्य, ठेकेदार के बिल तथा किए गए भुगतान का स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण कराने की मांग की है।
परफॉर्मेंस गारंटी के नाम पर नकद राशि जमा कराने का आरोप
शिकायत में मोहनपुरा पुनर्वास कॉलोनी एवं कायाकल्प-2 योजना के तहत ठेकेदारों से अतिरिक्त परफॉर्मेंस गारंटी के रूप में बड़ी राशि नकद जमा कराने का आरोप भी लगाया गया है।
पार्षद का कहना है कि इस संबंध में जारी की गई रसीदों को संदिग्ध बताते हुए उनकी जांच आवश्यक है। शिकायत में नकद राशि लेने की प्रक्रिया, रसीदों की वैधता, कैशबुक, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित ठेकेदारों से प्राप्त दस्तावेजों का मिलान कराने की मांग की गई है।
आवक-जावक रजिस्टर को लेकर भी गंभीर सवाल
शिकायत में नगर पालिका के आवक-जावक (Dispatch/Inward) रजिस्टर का मुद्दा भी उठाया गया है। इसमें कहा गया है कि पिछले दो-दो वर्षों से आवक-जावक रजिस्टर खुले रखे जाने की स्थिति सामने आ रही है, जिससे रिकॉर्ड में हेरफेर अथवा बैक डेटिंग की आशंका व्यक्त की गई है।
पार्षद ने संबंधित रजिस्टरों की जांच कर यह पता लगाने की मांग की है कि किस तारीख को कौन-सा पत्र आया, किस अधिकारी या शाखा को भेजा गया और उस पर क्या कार्रवाई हुई।
PIC बैठकों की सूचना नहीं देने का आरोप
शिकायत में पार्षद ने कहा है कि वह स्वयं PIC की सदस्य हैं, लेकिन पिछले करीब दो वर्षों से प्रेसीडेंट-इन-काउंसिल (PIC) की बैठकों की कोई आधिकारिक सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।
उन्होंने सवाल उठाया है कि यदि PIC की बैठकें आयोजित हुई हैं तो उनकी सूचना संबंधित सदस्यों को नियमानुसार क्यों नहीं दी गई और बैठकों में लिए गए निर्णयों की जानकारी संबंधित पार्षदों को क्यों नहीं उपलब्ध कराई गई।
डीजल बिलों में हर महीने 7 से 10 लाख रुपये का मामला
नगर पालिका के वाहनों एवं अन्य गतिविधियों से जुड़े डीजल बिलों को लेकर भी शिकायत में गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पार्षद के अनुसार प्रत्येक माह लगभग 7 लाख से 10 लाख रुपये तक के डीजल बिल लगाए जा रहे हैं। शिकायत में वाहनों के फर्जी इस्तेमाल और ईंधन आवंटन में बड़े पैमाने पर अनियमितता की आशंका जताई गई है।
मामले की जांच के लिए वाहनों की लॉगबुक, किलोमीटर रीडिंग, डीजल पर्चियां, पेट्रोल पंप के बिल, वाहन GPS/उपयोग रिकॉर्ड तथा संबंधित भुगतान दस्तावेजों का मिलान कराने की मांग की गई है।
Trommel मशीनों के नाम पर हर माह एक-एक लाख रुपये के भुगतान का आरोप
कचरा अलग करने वाली Trommel Machines को लेकर भी शिकायत में सवाल उठाए गए हैं। पार्षद का आरोप है कि मशीनों को 24 घंटे चालू दर्शाकर हर महीने लगभग एक-एक लाख रुपये के फर्जी बिल बनाए जा रहे हैं, जबकि वास्तविकता में मशीनें बंद पड़ी रहती हैं।
यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह नगर पालिका की कचरा प्रबंधन व्यवस्था और भुगतान प्रक्रिया दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। इसलिए मशीनों की वास्तविक स्थिति, संचालन का समय, बिजली खपत, ऑपरेटर की उपस्थिति, लॉगबुक और भुगतान बिलों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
दूसरी शिकायत में भी नगर पालिका के कर्मचारी पर गंभीर आरोप
इसी दिन वार्ड क्रमांक 05 की पार्षद की ओर से आयुक्त भोपाल संभाग को एक अन्य शिकायत भी दी गई है। इसमें नगर पालिका परिषद राजगढ़ में एक ही कर्मचारी को लेखापाल के अलावा तीन अन्य शाखाओं का नियम विरुद्ध प्रभार दिए जाने का मुद्दा उठाया गया है।
शिकायत में कहा गया है कि कर्मचारी संदीप गुप्ता को लेखापाल के साथ-साथ लोक निर्माण विभाग, टेंडर शाखा, नामांतरण और भंडारगृह का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। पार्षद के अनुसार इतने महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार एक ही कर्मचारी के पास होने के कारण वित्तीय अनियमितताओं की संभावना बनी हुई है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किए जाने तथा स्टोर में विभिन्न प्रकार की सामग्री बिना निर्धारित प्रक्रिया के लिए जाने की शिकायतें हैं।
इसके अलावा शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि कुछ ऐसी कॉलोनियों में लेन-देन एवं मकानों के नामांतरण किए गए हैं, जिन्हें पूर्व में कलेक्टर द्वारा अवैध घोषित किया गया था। इस संबंध में उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर जांच की मांग की गई है।
आयुक्त से उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
पार्षद ने दोनों शिकायतों में स्पष्ट रूप से कहा है कि लगाए गए आरोपों की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष एवं दस्तावेज आधारित जांच कराई जाए। साथ ही यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों एवं अन्य जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
मामले में भुगतान फाइलों, एमबी बुक, टेंडर दस्तावेज, कैशबुक, बैंक स्टेटमेंट, स्टॉक रजिस्टर, आवक-जावक रजिस्टर, वाहन लॉगबुक, डीजल बिल, मशीन संचालन रिकॉर्ड और PIC बैठकों से संबंधित दस्तावेजों की जांच अहम मानी जा रही है।
अब जांच पर टिकी नजर
नगर पालिका परिषद राजगढ़ की आधिकारिक वेबसाइट पर परिषद से संबंधित बजट, ई-टेंडर, परिषद और अन्य प्रशासनिक जानकारियां उपलब्ध कराई जाती हैं। जिला प्रशासन की वेबसाइट भी राजगढ़ जिले की नगर पालिकाओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराती है।

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